
Maha Saman Devalaya
Καλύτερη ώρα για επίσκεψη
दिसंबर से अप्रैल के बीच सुबह ९ बजे से पहले आएं, इस समय भीड़ कम होती है और रोशनी फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन होती है। जुलाई-अगस्त में आयोजित वार्षिक पेराहेरा उत्सव के दौरान आना एक अलग ही अनुभव है।
Συμβουλές προϋπολογισμού
प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन दान के लिए एक बक्सा रखा है। पास के रत्नपुरा राष्ट्रीय संग्रहालय का टिकट संयुक्त रूप से नहीं मिलता, दोनों अलग-अलग देखने होंगे।
Συνιστάται για
आस्थावान हिंदू-बौद्ध श्रद्धालु, फोटोग्राफी के शौकीन, इतिहास प्रेमी, स्थानीय संस्कृति को जानने वाले यात्री
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४५ मिनट से १ घंटा
Σχετικά
Γρήγορα στοιχεία: रत्नपुरा शहर के बीचोंबीच स्थित इस देवालय में हर साल लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं। यहाँ देवता समन की पूजा की जाती है, जिन्हें स्थानीय लोग सप्तकोण शिखर के संरक्षक और सभी रत्नों के स्वामी के रूप में मानते हैं।
Αξιοσημείωτα: यहाँ का सबसे अनोखा नज़ारा है पेराहेरा के समय, जब ३२ हाथी सज-धज कर निकलते हैं और मिट्टी के तेल के दीयों की रोशनी पूरे प्रांगण को सुनहरा कर देती है। यहाँ मौजूद प्राचीन शिलालेख बताते हैं कि इस मंदिर को १३वीं सदी में बनवाया गया था, फिर भी इसकी काष्ठ नक्काशी और चित्रकारी आज भी उतनी ही जीवंत है।
Εσωτερικές συμβουλές
- देवालय में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल बाहर निकालने होंगे, इसलिए मोज़े पहनकर आना एक अच्छा आइडिया रहेगा।
- दाहिनी ओर की दीवार पर लगी प्राचीन लकड़ी की नक्काशी को देखना न भूलें, यह १४वीं सदी की कलाकारी का अनोखा नमूना है।
- स्थानीय गाइड से अनुरोध करके पूजा विधि के बारे में विस्तार से जान सकते हैं, वे बिना किसी शुल्क के जानकारी साझा करते हैं।
- दोपहर १२ से २ बजे के बीच आने से बचें, इस समय यहाँ बहुत अधिक भीड़ होती है और धूप भी तेज़ होती है।
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